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वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट का लोकार्पण

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को नगर निगम हल्द्वानी-काठगोदाम सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट क्षमता 28 एमएलडी लागत 35 करोड 58 लाख तथा लिगेसी वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट लागत 3 करोड की योजनाओं का लोकार्पण कर हल्द्वानी को समर्पित किया।
मुख्यमंत्री धामी द्वारा पर्यटन एवं वन्यजीवों के पहचान के लिए बनने वाले अंतर्राष्ट्रीय चिड़ियाघर के लिए आवश्यकतानुसार धनराशि स्वीकृत करने की घोषणा की साथ ही उन्होंने कहा कि नशे से युवाओं को दूर रखने हेतु वर्ष 2025 रजत जयंती ड्रग्स फ्री देवभूमि प्रदेश होगा इसके लिए हल्द्वानी में नशा मुक्ति केन्द्र खोलने की भी घोषणा की।
मुख्यमंत्री ने सुशीला तिवारी चिकित्सालय में आधुनिक कैथलैब स्थापना की घोषणा करते हुए कहा कि चिकित्सालय में कैथलैब खुल जाने से हृदय रोगियों को आसानी से ईलाज मिल सकेगा।
मुख्यंमत्री ने गौलापार क्षतिग्रस्त नहर के जीर्णोद्धार हेतु धनराशि आवंटित करने की लालकुआं विधानसभा क्षेत्र में विद्युत पोल, नई लाईनों एव ट्रांसफार्मरों आदि के लिए धनराशि देने की तथा लालकुआं बंगाली कॉलोनी एवं हाथीखाना हेतु पेयजल एवं विद्युत हेतु डीपीआर बनाने के साथ ही धनराशि स्वीकृत करने की घोषणा की।
अपने सम्बोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा नमामि गंगे की कल्पना की गई थी वह धरातल पर साकार हो रही हैं। उन्होंने कहा गंगा नदी के साथ ही प्रदेश की सभी नदियों का प्रदूषण को समाप्त करने और नदियों को पुनर्जीवित करने के लिए योजना प्रारम्भ की गई है। उन्होंने कहा प्रदेश का अमृत योजना के तहत सबसे बडा सीवर प्लांट हल्द्वानी शहर में प्रारम्भ हो जाने से गौलानदी को प्रदूषण से बचाया जा सकेगा वही सीवर का प्रयोग जैविक खाद के रूप में किसानों द्वारा उपयोग मे लाई जा सकेगी। उन्होंने कहा कि यह प्लांट भविष्य में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि सरकार गंगा नदी सहित सभी नदियों को निर्मल एवं स्वच्छ रखने की ओर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में गंगा नदी के साथ ही सहायक नदियों को दूषित करने वाले 132 नालों मे सीवरेज प्लांट स्थापित कर दिये हैं तथा 11 सीवरेज प्लांटों पर निर्माण गतिमान है। उन्होंने कहा मां गंगा मोक्षदायिनी है गंगा का स्वच्छ एवं निर्मल होना जरूरी है इसके लिए सरकार द्वारा नमामि गंगे के तहत अभियान चलाकर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि उत्तराखण्ड की सीमाओं की अन्तिम छोर तक गंगा जल पीने योग्य एवं उच्चकोटि का हो यही हमारा संकल्प है। उन्होंने कहा कि अमृत कार्यक्रमों के द्वारा प्रधानमंत्री ने जो विजन दिया है हमारी सरकार निरंतर कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 26 जनवरी को प्रदेश की मानसखंड झांकी को गणतंत्र दिवस परेड में प्रथम स्थान प्राप्त कर उत्तराखण्ड ने इतिहास रचा है। हम सब के लिए यह पल गौरवशाली है। उन्होंने कहा कि झाकी में पुराणों मे गढवाल का केदारनाथ व कुमाऊं का मानसखंड के रूप में प्रदेश के 63 धार्मिक स्थलों का विस्तार से वर्णन किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा हल्द्वानी शहर की अवस्थापना सुविधाओं के विकास के लिए 22 सौ करोड धनराशि दी है जल्द ही हल्द्वानी शहर स्मार्ट सिटी का मूर्त रूप लेगा। मुख्यमंत्री श्री धामी द्वारा सीवरेज प्लांट का निरीक्षण भी किया गया।
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुये मेयर डा0 जोगेन्द्र पाल सिह रौतेला ने कहा कि अमृत योजना के अन्तर्गत बनने वाले प्रदेश का सबसे बडा सीवर प्लांट है। डा0 रौतेला ने कहा आज हल्द्वानी विकास की ओर अग्रसर हो रहा है। यह प्लांट स्वच्छता में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा जल्द ही तीन से चार माह के भीतर कम्पोस्ट प्लांट पर भी कार्य प्रारम्भ कर दिया जायेगा। उन्होंने कहा हल्द्वानी शहर में बैणीसेना के द्वारा डोर टू डोर कलैक्शन करने से निगम की आय 7 लाख से बढकर 32 लाख हो गई है। कार्यक्रम में विधायक डा0 मोहन सिंह बिष्ट तथा जिलाध्यक्ष भाजपा प्रताप बिष्ट द्वारा भी सम्बोधन किया गया।
कार्यक्रम में विधायक रामसिंह कैडा, दीवान सिंह बिष्ट, अध्यक्ष जिला पंचायत बेला तोलिया, आयुक्त दीपक रावत, आईजी नीलेश आनन्द भरणे, जिलाधिकारी धीराज सिंह गर्ब्याल, एसएसपी पंकज भटट, नगर आयुक्त पंकज उपाध्याय, उपजिलाधिकारी मनीष कुमार के साथ ही सैकडों की संख्या में लोग उपस्थित थे।

उत्तराखण्ड को प्रकृति ने पर्यटन की दृष्टि से बहुत अधिक समृद्ध बनाया है

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने मंगलवार को सचिवालय में पर्यटन विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं एवं गतिविधियों की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने प्रदेश में पर्यटन को आर्थिकी को मजबूत करने के लिए एक महत्त्वपूर्ण श्रोत बताया। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड को प्रकृति ने पर्यटन की दृष्टि से बहुत अधिक समृद्ध बनाया है।

मुख्य सचिव ने पिछली बैठक के निर्देशों के अनुपालन में पर्यटन विभाग द्वारा की गई तैयारियों की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि राफ्टिंग और कयाकिंग के लिए सर्वे करवा कर नए स्थानों का चिन्हीकरण कर राफ्टिंग और कयाकिंग को बढ़ावा दिया जाए। उन्होंने पैरा सेलिंग, वाटरबाइक, ऐरो पैरामोटर, ऐरो पैराग्लाइडिंग आदि गतिविधियों को बढ़ावा दिए जाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि इन गतिविधियों को बढ़ावा दिए जाने के लिए स्पर्धाएं एवं कार्यक्रमों का आयोजन किया जाए। इनका प्रचार प्रसार भी किया जाए ताकि पर्यटक इनकी ओर आकर्षित हों।

मुख्य सचिव ने कहा कि टिहरी झील में हाउस बोट और क्रूज आदि के साथ ही फिक्स्ड हॉट एयर बैलून की संभावनाओं को तलाशा जाए। उन्होंने कहा कि हिमालय दर्शन योजना के अंतर्गत मंदाकिनी घाटी की खूबसूरती को एक्सप्लोर किए जाने की आवश्यकता है।

मुख्य सचिव ने एस्ट्रो टूरिज्म की दिशा में हुई प्रगति की जानकारी लेते हुए कहा कि उत्तराखण्ड का वातावरण इसके लिए उपयुक्त है। उन्होंने कहा कि बेनिताल एस्ट्रो विलेज की तर्ज पर आसपास अन्य एस्ट्रो विलेज पर तेजी से कार्य करते हुए चारधाम यात्रियों को इस और आकर्षित किया जा सकता है। उन्होंने प्रत्येक जिले में कम से कम एक एस्ट्रो विलेज विकसित किए जाने के भी निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने रोपवे परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए, रोपवे परियोजनाओं को शीघ्र पूर्ण किए जाने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने चारधाम यात्रा ऑफिस, मानसखंड कॉरिडोर के कार्यों में भी गति लाने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने ट्रैकर्स और पर्वतारोहियों को रेडियो बैंड उपलब्ध कराए जाने हेतु व्यवस्थाएं सुनिश्चित किए जाने के भी निर्देश दिए। कहा कि इस क्षेत्र में बहुत सी तकनीकें उपलब्ध हैं। उनका अध्ययन कर सबसे उपयुक्त वर्ल्ड क्लास टेक्नोलॉजी का प्रयोग किया जाए।

इस अवसर पर सचिव श्री सचिन कुर्वे सहित अन्य सम्बन्धित अधिकारी उपस्थित थे।

सूबे के 1124 स्कूल में तैयार होगी स्मार्ट क्लासः डॉ0 धन सिंह रावत

समग्र शिक्षा के अंतर्गत बीआरपी/सीआरपी सहित शीघ्र भरे जायेंगे रिक्त पद

सूबे में शिक्षा के डिजिटलाइजेशन को लेकर राज्य सरकार लगातार प्रयासरत है। इसी क्रम में वर्ष 2023-24 तक सूबे के 1124 स्कूलों में स्मार्ट क्लासेज तैयार कर बच्चों को हाईब्रिड माध्यम से पढ़ाया जायेगा। इसके लिये शिक्षा विभाग ने समग्र शिक्षा के अंतर्गत आईसीटी परियोजना के तहत विद्यालयों का चयन किया है। इसके साथ ही राज्यभर के 200 अन्य विद्यालयों में व्यावसायिक पाठ्यक्रम भी शुरू किये जायेंगे। समग्र शिक्षा के अंतर्गत बीआरपी/सीआरपी सहित राज्य व जिला स्तर पर रिक्त सभी पदों को प्रतिनियुक्ति एवं आउटसोर्स के माध्यम से मार्च 2023 से पहले भरने का निर्णय लिया गया है।

सूबे के शिक्षा मंत्री डॉ0 धन सिंह रावत ने आज विद्यालयी शिक्षा महानिदेशालय में समग्र शिक्षा की समीक्षा बैठक ली। डॉ0 रावत ने बताया कि सूबे के 1124 स्कूलों में स्मार्ट क्लासेज के माध्यम से पढ़ाई कराई जायेगी, जिसके लिये शीघ्र ही सभी स्कूलों में स्मार्ट क्लासेज तैयार करने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिये हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रदेशभर में चयनित 840 स्कूलों में से 500 विद्यालयों में वुर्चअल क्लासेज चलाई जा रही है, जबकि शेष 340 स्कूलों में भी वर्चुअल क्लासेज शीघ्र ही शुरू कर दी जायेगी। इसी प्रकार वर्ष 2023-24 के अंतर्गत सूबे के कक्षा-01 से कक्षा-12 तक के 1124 विद्यालयों में स्मार्ट क्लासेज स्थापित की जायेगी, जिसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। शिक्षा मंत्री डॉ0 रावत ने बताया कि सूबे के 200 स्कूलों में नये शैक्षिक सत्र से कृषि, ऑटोमोटिव, आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं हार्डवेयर, ब्यूटी एंड वेलनेस, टूरिज्म एंड हॉसपिटालिटी तथा पलम्बर सहित सात व्यावसायिक कोर्स संचालित किये जायेंगे, जबकि इससे पूर्व भी 200 विद्यालयों में आठ व्यावसायिक कार्यक्रम संचालित किये जा रहे हैं, जिसमें 18 हजार 300 बच्चों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ0 रावत ने समग्र शिक्षा के अंतर्गत राज्य व जिला स्तर पर लम्बे समय से रिक्त चल रहे विभिन्न श्रेणी के पदों को न भरे जाने पर नाराजगी जताते हुये अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि बीआरपी/सीआरपी के 955 पदों सहित अन्य सभी रिक्त पदों को मार्च 2023 से पूर्व प्रतिनियुक्ति एवं आउटसोर्स के माध्यम से भरने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिये।

बैठक में सचिव विद्यालयी शिक्षा रविनाथ रमन, अपर सचिव योगेन्द्र यादव, महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा बंशीधर तिवारी, निदेशक माध्यमिक शिक्षा सीमा जौनसारी, निदेशक प्राथमिक शिक्षा वंदना गर्ब्याल, एपीडी समग्र शिक्षा डॉ0 मुकुल सती, संयुक्त निदेशक एस.बी.जोशी सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

सूबे में शिक्षा के डिजिटलाइजेशन को लेकर राज्य सरकार लगातार प्रयासरत है। इसी क्रम में वर्ष 2023-24 तक सूबे के 1124 स्कूलों में स्मार्ट क्लासेज तैयार कर बच्चों को हाईब्रिड माध्यम से पढ़ाया जायेगा। इसके लिये शिक्षा विभाग ने समग्र शिक्षा के अंतर्गत आईसीटी परियोजना के तहत विद्यालयों का चयन किया है। इसके साथ ही राज्यभर के 200 अन्य विद्यालयों में व्यावसायिक पाठ्यक्रम भी शुरू किये जायेंगे। समग्र शिक्षा के अंतर्गत बीआरपी/सीआरपी सहित राज्य व जिला स्तर पर रिक्त सभी पदों को प्रतिनियुक्ति एवं आउटसोर्स के माध्यम से मार्च 2023 से पहले भरने का निर्णय लिया गया है।

सूबे के शिक्षा मंत्री डॉ0 धन सिंह रावत ने आज विद्यालयी शिक्षा महानिदेशालय में समग्र शिक्षा की समीक्षा बैठक ली। डॉ0 रावत ने बताया कि सूबे के 1124 स्कूलों में स्मार्ट क्लासेज के माध्यम से पढ़ाई कराई जायेगी, जिसके लिये शीघ्र ही सभी स्कूलों में स्मार्ट क्लासेज तैयार करने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिये हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रदेशभर में चयनित 840 स्कूलों में से 500 विद्यालयों में वुर्चअल क्लासेज चलाई जा रही है, जबकि शेष 340 स्कूलों में भी वर्चुअल क्लासेज शीघ्र ही शुरू कर दी जायेगी। इसी प्रकार वर्ष 2023-24 के अंतर्गत सूबे के कक्षा-01 से कक्षा-12 तक के 1124 विद्यालयों में स्मार्ट क्लासेज स्थापित की जायेगी, जिसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। शिक्षा मंत्री डॉ0 रावत ने बताया कि सूबे के 200 स्कूलों में नये शैक्षिक सत्र से कृषि, ऑटोमोटिव, आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं हार्डवेयर, ब्यूटी एंड वेलनेस, टूरिज्म एंड हॉसपिटालिटी तथा पलम्बर सहित सात व्यावसायिक कोर्स संचालित किये जायेंगे, जबकि इससे पूर्व भी 200 विद्यालयों में आठ व्यावसायिक कार्यक्रम संचालित किये जा रहे हैं, जिसमें 18 हजार 300 बच्चों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ0 रावत ने समग्र शिक्षा के अंतर्गत राज्य व जिला स्तर पर लम्बे समय से रिक्त चल रहे विभिन्न श्रेणी के पदों को न भरे जाने पर नाराजगी जताते हुये अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि बीआरपी/सीआरपी के 955 पदों सहित अन्य सभी रिक्त पदों को मार्च 2023 से पूर्व प्रतिनियुक्ति एवं आउटसोर्स के माध्यम से भरने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिये।

बैठक में सचिव विद्यालयी शिक्षा रविनाथ रमन, अपर सचिव योगेन्द्र यादव, महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा बंशीधर तिवारी, निदेशक माध्यमिक शिक्षा सीमा जौनसारी, निदेशक प्राथमिक शिक्षा वंदना गर्ब्याल, एपीडी समग्र शिक्षा डॉ0 मुकुल सती, संयुक्त निदेशक एस.बी.जोशी सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

भारत के सबसे हैंडसम मुख्यमंत्री बने पुष्कर सिंह धामी

उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपनी सरल और सौम्य छवि के लिए काफी लोकप्रिय हैं। लोगों के बीच जाकर उनकी समस्याओं को सुनना और धर्मांतरण जैसे कड़े कानून बनाकर मुख्यमंत्री धामी चर्चा में बने हुए हैं। हाल ही में हुए “न्यूज़ एरिना इंडिया” के सर्वे में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को भारत के सबसे हैंडसम मुख्यमंत्री का खिताब मिला है।

न्यूज़ एरीना ने यह सर्वे 4 मुख्यमंत्रियों के बीच करवाया था जिसमें पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी और गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत के नाम शामिल थे जिनमें मुख्यमंत्री धामी 38 प्रतिशत वोटों के साथ पहले स्थान पर रहे, वहीं गोवा मुख्यमंत्री 32 प्रतिशत वोटों के साथ दूसरे व आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी तीसरे व पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान चौथे स्थान पर रहे।

हैंडसम मुख्यमंत्रियों के इस सर्वे में इन 4 मुख्यमंत्रियों के नाम शामिल करने से पहले भी जनता से राय ली गई थी, जिसमें 20 हजार के लगभग लोगों ने चार नामों का सुझाव दिया था, जिसके बाद ट्विटर पर कराए गए इस सर्वे में 23 हजार से ज्यादा लोगों ने मुख्यमंत्री धामी के नाम पर मुहर लगाई। इससे पहले हुए ABP न्यूज़ के सबसे लोकप्रिय मुख्यमंत्री के सर्वे में भी उत्तराखण्ड के सीएम को 6वां स्थान मिला था।

नैनीताल हाई कोर्ट ने दिया सरकार को झटका

उत्तराखंड सरकार को एक बार फिर से झटका लगा है । झटका राज्य सरकार को नैनीताल हाईकोर्ट ने दिया है । नैनीताल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के उस फैसले को पलट दिया जिसमें चमोली की जिला पंचायत अध्यक्ष रजनी भंडारी को बर्खास्त किया गया था। रजनी भंडारी 2019 में जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर जीत हासिल करने में कामयाब हुई थी। लेकिन राज्य सरकार ने वित्तीय गड़बड़ी के आरोप में रजनी भंडारी को 25 जनवरी को उनके पद से हटा दिया। रजनी भंडारी इसके बाद नैनीताल हाईकोर्ट की शरण में गई। रजनी भंडारी की तरफ से उसके वकीलों ने जोरदार पैरवी की और कोर्ट में दलीलें पेश की कि रजनी भंडारी को हटाने के लिए पंचायती राज की नियमावली का पालन नहीं किया गया है। इसके बाद नैनीताल हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के फैसले को बदल दिया ।अब रजनी भंडारी एक बार फिर से जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर बहाल हो गई है । आपको बता दें कि रजनी भंडारी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेंद्र भंडारी की पत्नी है। राजेंद्र भंडारी वर्तमान समय में बद्रीनाथ विधानसभा सीट से विधायक है। राज्य सरकार को इससे पहले उत्तरकाशी के जिला पंचायत अध्यक्ष दीपक बिजलवान को हटाने के मामले में भी सुप्रीम कोर्ट झटका दे चुका है ।दीपक बिजलवान पर भी वित्तीय गड़बड़ी के आरोप लगाते हुए राज्य सरकार ने उन्हें बर्खास्त कर दिया था। इसके बाद दीपक बिजलवान नैनीताल हाईकोर्ट होते हुए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे, जहां उनकी फिर से बहाली का रास्ता साफ हुआ।रजनी भंडारी पर 2012 में नंदा राज यात्रा के लिए कामों के आवंटन में गड़बड़ी के आरोप लगे थे। 10 साल बाद राज्य सरकार ने अपनी कार्रवाई की है इससे राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े होते हैं।

जोशीमठ में दरारों वाले भवनों की संख्या में बढ़ोतरी नहीं

सचिव आपदा प्रबन्धन डा0 रंजीत कुमार सिन्हा ने जोशीमठ नगर क्षेत्र में हो रहे भू-धंसाव एवं भूस्खलन के उपरान्त राज्य सरकार द्वारा किये जा रहे राहत व बचाव तथा स्थायी/अस्थायी पुनर्वास आदि से सम्बन्धित किये जा रहे कार्यो की जानकारी देते हुए बताया कि जोशीमठ में अग्रिम राहत के तौर पर 3.50 करोड़ रूपये की धनराशि 233 प्रभावित भूस्वामियों को वितरित कर दी गई है |

105 प्रभावित किरायेदारों को 52.50 लाख की धनराशि तत्काल राहत के रूप में वितरित की गई है | सचिव आपदा प्रबन्धन ने जानकारी दी है कि जोशीमठ में प्रारम्भ में निकलने वाले पानी का डिस्चार्ज जो कि 06 जनवरी 2023 को 540 एल.पी.एम. था, वर्तमान में घटकर 170 एलपीएम हो गया है।

अस्थायी रूप से चिन्हित राहत शिविरों में जोशीमठ में कुल 661 कक्ष हैं जिनकी क्षमता 2957 लोगों की है तथा पीपलकोटी में 491 कक्ष हैं जिनकी क्षमता 2205 लोगों की है। अभी तक 863 भवनों में दरारें दृष्टिगत हुई है। दरारों वाले भवनों की संख्या में बढ़ोतरी नहीं हुई है | उन्होनें जानकारी दी कि गांधीनगर में 01, सिंहधार में 02, मनोहरबाग में 05, सुनील में 07 क्षेत्र / वार्ड असुरक्षित घोषित किए गए हैं। 181 भवन असुरक्षित क्षेत्र में स्थित है। 248 परिवार सुरक्षा के दृष्टिगत अस्थायी रूप से विस्थापित किये गये हैं। विस्थापित परिवार के सदस्यों की संख्या 900 है। 41 प्रभावित परिवार रिश्तेदारों या किराए के घरों में चले गए हैं |

UKSSSC Update.गड़बड़ी में शामिल आयोग के अधिकारियों पर कार्रवाई करने से कौन रोक रहा है?

उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग यानी यूकेएसएसएससी के पूर्व अधिकारियों को शासन स्तर पर बैठे कुछ लोगों का संरक्षण मिल रहा है। यही वजह है कि यूकेएसएसएससी के पूर्व सचिव संतोष बडोनी और अन्य पांच अधिकारियों के खिलाफ विजिलेंस मुकदमा दर्ज नहीं करवा रही है । विजिलेंस ने अपने छानबीन के बाद मुकदमा दर्ज करने की फाइल शासन को भेजी थी जिसे शासन ने खारिज कर दिया।

लेकिन विजिलेंस अपनी कार्रवाई को लगातार आगे बढ़ा रही है। और एक बार फिर से वह शासन में अनुमति के लिए फाइल भेज रही है। शासन की तरफ से फाइल को खारिज किए जाने को लेकर टिप्पणी भी पता चली है। खबर है कि शासन ने फाइल को मंजूर नहीं करने के पीछे भी एक तर्क दिया है। 2016 में आयोग में भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई थी और आरएमएस टेक्नोसोल्यूशंस नाम की कंपनी ने भर्ती प्रक्रिया को करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

यूकेएसएसएससी के पूर्व सचिव संतोष बडोनी और अन्य पांच अधिकारियों के खिलाफ विजिलेंस मुकदमा दर्ज नहीं करवा रही है

आरएमएस टेक्नोसोल्यूशंस के कर्ताधर्ता तो जेल की सलाखों के पीछे हैं। लेकिन इस कंपनी को किसने काम दिया इसको लेकर ही मशक्कत हो रही है। विजिलेंस और एसटीएफ ने अपनी जांच में यह तो पता लगा ही लिया कि ना सिर्फ प्रशासनिक स्तर पर गड़बड़ी हुई है । बल्कि आरएमएस टेक्नोसोल्यूशंस को काम देने के लिए वित्तीय गड़बड़ी भी की गई है। शासन की तरफ से कहा गया है कि 2016 में जब काम दिया गया था उसके बाद की सारी फाइलें उसके पास नहीं पहुंची है। इसलिए मुकदमा दर्ज करने की मंजूरी फिलहाल नहीं दी जा सकती।

उत्तराखंड में अब स्पेशलिस्ट डॉक्टर्स की कमी को दूर करने के लिए मास्टर प्लान तैयार

स्वास्थ्य सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने अवगत कराया कि लगातार पहाड़ी क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा की जा रही है। कई जगहों से हमें यह जानकारी मिली कि विशेषज्ञ डॉक्टर की कमी के कारण ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले मरीजों को खासी दिक्कत का सामना करना पड़ता है. लेकिन अब राज्य सरकार विशेषज्ञों को तैनात करने की दिशा में काम कर रही है.

डॉक्टर आर राजेश कुमार ने अवगत कराया कि स्वास्थ्य विभाग के पास ना तो दवाइयों की कमी है, ना सुविधाओं की कमी है और न ही अस्पतालों में मशीनों की कमी है। लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टर ना होने से कई बार समस्या बढ़ जाती थी। इसे अब दुरुस्त कर लिया जाएगा।

उत्तराखंड में अब स्पेशलिस्ट डॉक्टर्स की कमी को दूर करने के लिए मास्टर प्लान तैयार किया गया है । राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने इसके लिए सारी तैयारियां कर ली है। स्पेशलिस्ट डॉक्टर्स की कमी के कारण जहां पहाड़ों और ग्रामीण क्षेत्रों में मरीजों को दिक्कत होती थी अब उन दिक्कतों को दूर कर लिया जाएगा।

सभी के स्वास्थ्य का ठीक से ध्यान रखा जाए इसके लिए नेशनल हेल्थ मिशन लगातार अपनी तैयारियों में जुटा हुआ है। इसी के अंतर्गत 16 फरवरी को पहले चरण के इंटरव्यू किए जाने हैं। राज्य में विशेषज्ञ डॉक्टर को अब राज्य सरकार की तरफ से वह तमाम सुविधाएं मिल सकेंगी जो उन्हें निजी क्षेत्र में मिलती है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की लगातार तैयारियों में जुटा हुआ था।

राज्य के स्वास्थ्य सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने अवगत कराया कि लगातार पहाड़ी क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा की जा रही है। कई जगहों से हमें यह जानकारी मिली कि विशेषज्ञ डॉक्टर की कमी के कारण ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले मरीजों को खासी दिक्कत का सामना करना पड़ता है. लेकिन अब राज्य सरकार विशेषज्ञों को तैनात करने की दिशा में काम कर रही है. डॉक्टर आर राजेश कुमार ने अवगत कराया कि स्वास्थ्य विभाग के पास ना तो दवाइयों की कमी है, ना सुविधाओं की कमी है और न ही अस्पतालों में मशीनों की कमी है। लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टर ना होने से कई बार समस्या बढ़ जाती थी। इसे अब दुरुस्त कर लिया जाएगा।
राज्य का स्वास्थ्य विभाग एक नए मिशन के साथ तैयारियों में जुटा हुआ है ताकि प्रत्येक नागरिक को सरकारी अस्पतालों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सके।

Uttarakhand. बद्रीनाथ यात्रा को लेकर संशय

विश्व प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम की यात्रा पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। जोशीमठ से होते हुए जो मार्ग बद्रीनाथ धाम तक पहुंचता है उस रास्ते में भी अब दरारें पड़ने लगी है। उत्तराखंड में काफी समय से बद्रीनाथ धाम के लिए बाईपास रोड बनाने की तैयारी की गई थी। लेकिन स्थानीय निवासियों की नाराजगी और विरोध के चलते यह बाईपास नहीं बन पाया ।

जोशीमठ से कुछ पहले हेलंग से इस बाईपास का निर्माण होना था। जो मारवाड़ी क्षेत्र तक जाना था। यहां से बद्रीनाथ धाम तक पहुंचना थोड़ा आसान होता। अब एक बार फिर से हेलंग मारवाड़ी बायपास मार्ग की चर्चा होने लगी है। बद्रीनाथ धाम के कपाट खोले जाने की तारीखों का ऐलान वसंत पंचमी के दिन किया जाता है। लेकिन इस बार यात्रा पर संकट दिखाई दे रहा है।

2022 में बद्रीनाथ धाम में 17 लाख तीर्थयात्री पहुंचे थे । एक अनुमान के मुताबिक जोशीमठ शहर के बीच से एक से डेढ़ लाख वाहनों की आवाजाही हुई थी। यानी अगर मार्ग असुरक्षित हुआ तो वाहनों की आवाजाही प्रभावित होगी जिससे यात्रा भी प्रभावित हो सकती है। देश के आठ प्रतिष्ठित संस्थान जोशीमठ संकट पर लगातार अपना अध्ययन कर रहे हैं। नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी को इन सभी 8 संस्थानों ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट उपलब्ध करा दी है।

2013 में केदारनाथ त्रासदी में भी यात्रा पूरी तरीके से प्रभावित हुई थी । लेकिन इस बार उम्मीद की जानी चाहिए कि सरकार समय रहते कोई उपाय निकाल लेगी ।और यात्रा बाधित होने जैसा संकट नहीं आएगा

सरकार ने दिया राहत पैकेज

  1. अगले छह महीने तक हर परिवार को 5 हज़ार रूपए प्रतिमाह दिए जायेंगे
  2. भू-धंसाव प्रभावितों के भवनों का निरीक्षण एक जिला स्तरीय समिति करेगी नुक्सान का आंकलन किया जायेगा तभी मुआवजा निर्धारित होगा .
  3. भू-धंसाव प्रभावित परिवारों को राहत शिविर के रूप में होटल या अन्य आवासीय इकाइयों में ठहराए जायेगा . वास्तविक व्यय अथवा 950 रुपये प्रतिदिन प्रतिकक्ष, जो भी कम हो, उपलब्ध कराया जायेगा. इस अवधि में उन्हें भोजन के लिए प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 450 रुपये दिए जाएंगे.
  4. पुनर्वास के लिए कोटी फार्म, पीपलकोटी, गोचर, ग्राम गौख सेलंग तथा ग्राम ढाक में चयनित भूखंडों के क्षेत्रीय सर्वेक्षण के उपरांत वहां प्री-फेब्रीकेटेड संरचनाओं के निर्माण
  5. विस्थापन नीति निर्धारित होने से पहले अग्रिम धनराशि के रूप में डेढ लाख रुपये दिए जा रहे हैं.
  6. नवंबर 2022 से अगले छह माह तक के लिए बिजली एवं पानी के विद्युत बिल माफ.
  7. बैंकों आदि से लिए ऋण की वसूली एक साल के लिए स्थगित.
  8. प्रदेश के सभी पर्वतीय शहरों की धारण क्षमता का अध्ययन .