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समान नागरिक संहिता पर एक कदम आगे बड़ी बीजेपी

देहरादून। 6 फरवरी 2024 का दिन उत्तराखण्ड के स्वर्णिम इतिहास में दर्ज हो गया है। आज समान नागरिक संहिता (UCC) का अधिनयम (Bill) विधानसभा के पटल पर रख दिया गया। सरकार के इस कदम के बाद उत्तराखण्ड देश का पहला राज्य बन गया है जहां यूसीसी को लागू करने की दिशा में ठोस पहल की गई है। चूंकि राज्य की धामी सरकार को स्पष्ट बहुमत प्राप्त है लिहाजा इस बिल का सदन में पारित होना तय माना जा रहा है। संवैधानिक जरूरत पड़ी तो इस कानून को लागू करने से पहले अनुमोदन के लिए राष्ट्रपति के भेजा जाएगा। लेकिन, वहां भी इसकी मंजूरी में कोई अड़चन नहीं आएगी क्योंकि तमाम परिस्थितियां मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मंशा के अनुकूल हैं।

 आखरिकार मंगलवार को वो दिन आ ही गया जिसका उत्तराखण्ड ही नहीं बल्कि देश का एक बड़ा वर्ग बेसब्री से इंतजार कर रहा था। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने वायदे के अनुरूप देवभूमि में यूसीसी को लागू करने की ओर निर्णायक कदम उठा दिया। पूर्वाह्न तकरीबन 11 बजे मुख्यमंत्री स्वयं यूसीसी के ड्राफ्ट की प्रति लेकर विधानसभा की कार्यवाही में भाग लेने पहुंचे। माथे पर तिलक, सफेद कुर्ता पैजामा, नारंगी रंग का वास्कट और गले में मफलर पहने धामी आत्मविश्वास से लबरेज दिखे। उनके के चेहरे पर संतुष्टि का भाव भी था। हो भी क्यों न ! वह 2022 के विधानसभा चुनाव से ऐनपूर्व जनता से किया वायदा पूरा करने जो जा रहे थे। समान नागरिक संहिता (UCC) के रूप में एक ऐसा कानून जो जो जाति से परे, धर्म से परे, यहां तक कि आप स्त्री हैं या पुरुष, इससे भी परे होगा। जिस कानून में आम और खास का भेद नहीं होगा। यानि जो सभी के लिए एक समान होगा। 

202 पेज के समान नागरिक संहिता अधिनयम 2024 का ड्राफ्ट हर पहलू पर विचार विमर्श करने के बाद तैयार किया गया है। सलीके से तैयार किए गए इस ड्राफ्ट में शादी, तलाक, विरासत और गोद लेने से जुड़े मामलों को ही शामिल किया गया है। इन विषयों, खासतौर पर विवाह प्रक्रिया को लेकर जो प्राविधान बनाए गए हैं उनमें हर जाति, धर्म अथवा पंथ की परम्पराओं और रीति रिवाजों से कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है। वैवाहिक प्रक्रिया में धार्मिक मान्यताओं पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। धार्मिक रीति-रिवाज जस के तस रहेंगे। ऐसा भी नहीं है कि शादी पंडित या मौलवी नहीं कराएंगे। खान-पान, पूजा-इबादत, वेश-भूषा पर भी कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। लेकिन सख्ती इस बात पर की गई है कि हर दम्पती को अनिर्वाय रूप से अपनी शादी का रजिस्ट्रेशन करना पड़ेगा। अन्यथा वे सरकारी सुविधाओं का लाभ लेने से वंचित रहेंगे। तलाक के बगैर कोई व्यक्ति दूसरी शादी नहीं कर पाएगा। ऐसा करने पर उसे दण्ड या आर्थक दण्ड या फिर दोनो भुगतने होंगे।

अधिनियम में जहां एक ओर विवाह, तलाक और विवाह की शून्यता के पंजीकरण के लिए सुगम एवं सरल प्रक्रिया बनाई गई है। सम्बंधित दम्पती और अधिकारियों की भी जिम्मेदारी व जवाबदेही तय की गई है। यदि कोई नागरिक विवाह का पंजीकरण करने में अनदेखी करता है या नियमों का पालन नहीं करता है तो उसके लिए अधिकतम 25000 के अर्थदण्ड का प्राविधान रखा गया है। साथ ही यदि उप निबंधक जानबूझकर संहिता में निहित कार्यवाही करने में विफल रहता है तो वह भी अधिकतम 25000 रुपये के अर्थदण्ड का अधिकारी होगा।

विवाह, तलाक एवं विवाह की शून्यता के पंजीकरण के लिए एक सरकारी तंत्र बनाया जाएगा। जिसमें महा निबंधक सचिव स्तर, निबंधक उपजिलाधिकारी एवं उप निबंधक राज्य सरकार के अधिसूचित अधिकारी होंगे। नागरिकों के पास सूचना का अधिकार की तर्ज पर रजिस्ट्रेशन को लेकर अपील का अधिकार भी होगा। निबंधक एवं महा निबंधक दो अपीलीय स्तर के अधिकारी होंगे। साथ ही हर स्तर पर पंजिका का रखरखाव किया जाएगा। ताकि पारदर्शिता बनी रहे। अपील के लिए समयबद्ध समय सीमा भी तय की गई है, ताकि प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो।

संहिता में दाम्पत्य अधिकारों को सरुक्षित बनाने के हर संभव प्राविधान किए गए हैं। साथ ही जो महर, प्रभूत, स्त्रीधन या कोई अन्य सम्पत्ति जो पत्नी को उपहार स्वरूप दी गई है, वह भरण पोषण के दावे में सम्मिलित नहीं होकर अतिरिक्त होगी। 5 वर्ष से कम आयु के बच्चे की अभिरक्षा सामान्यत माता के पास रहेगी। संहिता में बच्चों की अभिरक्षा के अन्तर्गत बच्चों का हित सर्वोत्तम एवं कल्याण सर्वोपरि होगा। कोई विवाद होने पर दम्पती के मेल मिलाप के लिए न्यायालय हरसंभव समुचित प्रयास करेंगे।

शून्य एवं शून्यीकरण विवाह के लिए नियम बनाए गए हैं। विवाह विच्छेद के लिए किसी भी पक्ष को मारकर्म, क्रूरता, कम से कम दो वर्ष तक बिना युक्तियुक्त कारण से अलगाव, धर्म परिवर्तन, विकृत चित, निरन्तर मानसिक विकार, संचारी यौन रोग, लगातार 7 वर्ष तक किसी पक्ष के जीवित रहने की सूचना नहीं होने का आधार लिया गया है। विवाह विच्छेदन की कार्यवाही अनुतोष एवं आपसी सहमति से ही जा सकेगी। सबसे महत्वपूर्ण बात है कि किसी भी प्रथा, रूढ़ि परम्परा या किसी पक्षकार को किसी व्यक्तिगत विधि या अधिनियम के अनुसार विवाह विच्छेदन (तलाक) नहीं हो सकेगा। इस संहिता के लागू होने के बाद संहिता में प्राविधानित प्रक्रिया के अनुसार ही विवाह विच्छेदन होगा। पुरुष-महिला को तलाक देने के समान अधिकार होंगे। लिव-इन रिलेशनशिप डिक्लेयर करना जरूरी होगा। लिव इन रजिस्ट्रेशन नहीं कराने पर 6 माह की सजा होगी। लिव-इन में पैदा बच्चों को संपत्ति में समान अधिकार मिलेगा।

उम्मीद की जा रही है कि यह समान नागरिक संहिता उत्तराखण्ड के मध्य एक प्रगतिवादी, लोकप्रिय एवं सर्ववर्ग ग्राही संहिता साबित होगी। यह संहिता उत्तराखण्ड के नागरिकों के उच्च मानसिक स्तर का द्योतक होगी तथा राज्य के विकास में एक मील का पत्थर साबित होगी।

मेडिकल कॉलेज के काम पूरा करने के निर्देश

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने राज्य में निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेजों एवं अस्पतालों के साथ ही उनमें डॉक्टर्स, नर्सिंग ऑफिसर्स, पैरामेडिकल एण्ड एन्सिलरी स्टाफ के पद सृजन आदि की प्रक्रिया भी साथ-साथ संचालित करने की हिदायत स्वास्थ्य विभाग, वित्त विभाग एवं कार्मिक विभाग को दी है। उन्होंने कहा कि इस तरह से निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेजों का समय पर संचालन शुरू हो पाएगा। मुख्य सचिव ने हरिद्वार मेडिकल कॉलेज में 216 तथा पिथौरागढ़ मेडिकल कॉलेज में 216 डॉक्टर्स के पदों से सम्बन्धित स्थिति को तत्काल स्पष्ट करने के निर्देश वित्त विभाग को दिए हैं। उन्होंने मेडिकल कॉलेजों के निर्माण के प्रोजेक्ट्स को हॉलिस्टिक अप्रोच के साथ पूरा करने के निर्देश सम्बन्धित अधिकारियों को दिए।

मेडिकल टूरिज्म की बेहतरीन संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए सीएस श्रीमती रतूड़ी ने पिथौरागढ़ मेडिकल कॉलेज तथा नैनीताल के भवाली स्थित टीबी सेनेटोरियम के सम्बन्ध में एक बैठक पर्यटन विभाग के साथ आयोजित करने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव श्रीमती राधा रतूड़ी की अध्यक्षता में विधानसभा भवन में राजकीय मेडिकल कॉलेज पिथौरागढ़ के ढांचे के गठन में राजकीय मेडिकल कॉलेज हरिद्वार के सापेक्ष संख्या में कम हो रहे पदों के संबंध में बैठक सम्पन्न हुई।


राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूती के दृष्टिगत मुख्य सचिव श्रीमती राधा रतूड़ी ने राज्य के मैदानी जिलों के समान ही पर्वतीय जिलों में बनने वाले मेडिकल कॉलेज एवं अस्पतालों में भी पर्याप्त संख्या में डॉक्टर्स, नर्सिंग स्टाफ तथा अन्य स्टाफ की व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश स्वास्थ्य, वित्त एवं कार्मिक विभाग को दिए। मुख्य सचिव ने कहा कि पिथौरागढ़ मेडिकल कॉलेज से न केवल पिथौरागढ़ जनपद को बल्कि जनपद चंपावत तथा जनपद बागेश्वर व अल्मोड़ा के एक बड़े भाग की आबादी को स्वास्थ्य सेवाएं मिलेगी। साथ ही पड़ोसी देश नेपाल द्वारा भी यहाँ की स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाने की संभावना बढ़ जायेगी। पिथौरागढ़ मेडिकल कॉलेज का संचालन आरम्भ होने के बाद इसके आस-पास के क्षेत्रों में चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं अन्य सम्बन्धित सुविधाओं, उद्यमों के विकास एवं स्वरोजगार के नए अवसरों की संभावनाएं भी बढ़ेगी।

बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने स्वास्थ्य विभाग को हरिद्वार जिलें में मातृ मृत्यु दर को कम करने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने गर्भवती माताओं एवं नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य के फॉलोअप हेतु टै्रकिंग सिस्टम बनाने, सभी गर्भवती महिलाओं की अनिवार्य प्रसवपूर्व जांच (एएनसी ) करने, सभी गर्भवती माताओं का संस्थागत प्रसव करवाने के भी निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने मातृ मृत्यु दर की दृष्टि से हाई रिस्क एरियाज में आशा वर्कर हेतु विशेष ऑरियेण्टेशन प्रोग्राम संचालित करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने आशा वर्कर्स के कार्यों के मूल्याकंन में मातृ मृत्यु दर को भी शामिल करने के निर्देश दिए हैं।

बैठक में सचिव डा0 आर राजेश कुमार, श्री वी षणमुगम सहित स्वास्थ्य, वित्त, कार्मिक एवं न्याय विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।

DM फर्जी आदेश हुआ वायरल

सोशल मीडिया पर आज दिनाक 5फरवरी 2024 को कक्षा 12 तक की स्कूल में बच्चों की छुट्टी की झूठी आदेश चल रहा है।
जिलाधिकारी श्रीमती सोनिका ने कहा कि जिला प्रशासन ने विद्यालय में बच्चों की छुट्टी का कोई आदेश जारी नहीं की है।
उन्होंने लोगों को भ्रमित करने इस तरह की fake आदेश चलाने वाले अराजक तत्वों/व्यक्ति के विरुद्ध आपदा प्रबंधन के तहत कार्यवाही के निर्देश दिए।

जिला सूचना अधिकारी
देहरादून।

मुख्यमंत्री धामी का ने महिलाओं संग साझा की बचपन की यादें

शक्ति वंदन महोत्सव के अंतर्गत जनपद रुद्रप्रयाग में आयोजित ब्वै, ब्वारी, नौनी कौथिग के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विभिन्न महिला समूहों के साथ विभिन्न क्रियाकलाप कर स्थानीय संस्कृति को जाना। श्री केदारनाथ धाम में एनआरएलएम के तहत काली माता स्वयं सहायता समूह एवं देवी धार स्वयं सहायता समूह के साथ महा प्रसाद बनाते हुए मुख्यमंत्री ने अपने बचपन की यादें उनसे साझा की। हाथ से महाप्रसाद बनाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने बचपन में घर के कार्यों में खूब हाथ बटाया है। बचपन में वो त्योहारों के समय अपनी माता जी के साथ स्थानीय पकवान बनाने में खूब सहयोग करते थे। वहीं सिलबट्टे पर कई बार अपनी माता जी के साथ मिलकर नमक भी पीसा है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ब्वै, ब्वारी, नौनी कौथिग के दौरान महिलाओं संग बनाया चौलाई से तैयार महाप्रसाद।

पिछली यात्रा के दौरान करीब 70 लाख रुपए से ज्यादा का किया था कारोबार।

इस वर्ष दो करोड़ का है लक्ष्य

आटा गूँथने से लेकर जंगल में घास काटने तक में उन्होंने हमेशा हाथ बटाया। इस अवसर पर उन्होंने महिलाओं से सरकार की महाप्रसाद योजना से जुड़ने के बाद आजीविका में हुए बदलाव की जानकारी भी ली। रूरल बिजनेस इंक्यूबेटर की ओर से लगे स्टॉल पर शिल्पकार के उद्यमियों एवं स्वास्तिक स्वयं सहायता की महिलाओं के साथ मिलकर मुख्यमंत्री धामी ने स्टोन पेन्टिंग करते हुए उनकी संस्था की जानकारी ली। वहीं उन्नती क्लस्टर संगठन, कालीमठ कोटमा की महिलाओं के स्टॉल पर कताई एवं बुनाई की। संगठन की अध्यक्ष सरिता देवी ने उन्हें हाथकरघा की पूरी विधि बताते हुए अपने संगठन की जानकारी दी।

उन्होंने समूह के उत्पादों की सराहना करते हुए श्री केदारनाथ धाम एवं यात्रा मार्ग पर भी आउटलेट खोलने एवं पारंपरिक तरीके से बन रहे दोखे, शौल, टोपी आदि का खूब प्रचार करने को कहा। महिला समूहों ने केदारनाथ यात्रा के दौरान करीब 70 लाख रुपए से ज्यादा का किया कारोबार* केदारनाथ यात्रा से जुडे़ विभिन्न महिला समूहों ने पिछले वर्ष यात्रा के दौरान 70 लाख रुपए से ज्यादा का व्यापार किया था। अकेले चोलाई के प्रसाद से लगभग 65 लाख रूपए का व्यवसाय हुआ।

इसके अलावा स्थानीय हर्बल धूप, चूरमा, बेलपत्री, शहद, जूट एवं रेशम के बैग आदि से पांच लाख रुपये की कमाई महिलाओं द्वारा की गई है। विभिन्न महिला समूहों से जुड़ी 500 से ज्यादा महिलाओं को इससे रोजगार भी मिला। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी सरकार के महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं के उत्थान को किए जा रहे प्रयासों को भी इससे बल मिला है। वहीं जिला प्रशासन रुद्रप्रयाग ने अगली यात्रा में दो करोड़ रुपये का प्रसाद बेचने का लक्ष्य रखा है।

CBI जांच के बाद अब उत्तराखंड में होगी ED की एंट्री. अडंगा कौन लगा रहा है जांच में?

उत्तराखंड में सीबीआई के बाद अब ED की एंट्री होने जा रही है. ED यानी एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट यानी प्रवर्तन निदेशालय ने उत्तराखंड वन विभाग को चिट्ठी लिखकर पांच आईएफएस अधिकारियों सहित कुल 8 अधिकारियों के वित्तीय ब्यौरे तलब किए हैं। लेकिन वन विभाग ने अभी तक प्रवर्तन निदेशालय को इसकी जानकारी नहीं दी है। वन विभाग ने शासन को चिट्ठी लिखकर मंजूरी मांगी है कि क्या इन आठ अधिकारियों के वित्तीय जानकारी परिवर्तन निदेशालय को दिए जाएं या नहीं दिए जाएं? लेकिन शासन ने अक्टूबर 2023 से इस फाइल पर कोई फैसला नहीं लिया है।

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व से जुड़ा है मामला

मामला उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध कॉर्बेट टाइगर रिजर्व से जुड़ा हुआ है। यहां छह हजार पेड़ों के अवैध रूप से कटान का मामला चर्चाओं में गरमाया हुआ है। पहले विजिलेंस की जांच हुई और उसके बाद एसआईटी के गठन के लिए भी राज्य सरकार तैयारी कर रही थी। लेकिन मामला नैनीताल हाईकोर्ट में गया और नैनीताल हाईकोर्ट के निर्देश के बाद इस पूरे मामले की जांच सीबीआई कर रही है।

अवैध कटान और निर्माण का है मामला

सरकारी अधिकारियों पर आरोप है कि इन्होंने लापरवाही की है। गलत तरीके से पेड़ों के कटान की इजाजत दी गई है। साथ-साथ कॉर्बेट पार्क के आसपास अवैध रूप से निर्माण कार्य हो गए हैं। जब यह पूरा प्रकरण चल रहा था तो भारत सरकार के महानिदेशक वन ने मामले की जांच की थी। तीन सदस्य जांच ने अपने रिपोर्ट में गड़बड़ झाले की पुष्टि की थी और आठ अधिकारियों के नाम का खुलासा किया था। इसके बाद मामले की जांच सीबीआई कर रही है और अब सीबीआई के साथ-साथ ED की एंट्री भी होने जा रही है।

5 आईएफएस कौन हैं?

लेकिन शासन स्तर पर फाइल पर मंजूरी अभी नहीं दी गई है।जिन आठ अधिकारियों के नाम आए हैं, उनमें से पांच आईएफएस अधिकारी हैं। उनमें तीन अभी वन विभाग में ही तैनात है। इनमें सुशांत पटनायक, राहुल और अखिलेश तिवारी शामिल है। जबकि जे एस सुहाग रिटायर हो चुके हैं और लंबी बीमारी के बाद उनका निधन भी हो चुका है। किशन चंद भी रिटायर हो चुके हैं और उन्हें जेल की सलाखों के पीछे भी जाना पड़ा था।

सरकार किसी को नहीं बचा रही: वन मंत्री सुबोध उनियाल

उत्तराखंड के वन मंत्री सुबोध उनियाल कहते हैं कि राज्य सरकार इस मामले को लेकर पहले ही गंभीर है। मामले का खुलासा होने के बाद जब जांच हुई तो जे एस सुहाग और किशन चंद को सरकार ने सस्पेंड किया था। हम कोई कोताही नहीं बरत रहे हैं और जिसने गड़बड़ी की है उसे उसकी सजा दिला कर रहेंगे।

शासन ने क्यों दबाई है फाइल?

लेकिन प्रवर्तन निदेशालय ने जब वित्तीय लेनदेन की जानकारी मांगी है तो उसे शासन स्तर पर मंजूरी अभी क्यों नहीं मिली है? यह एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब मिलना बाकी है।

रामचरितमानस का पाठ किया CM धामी ने

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज प्रातः काल मुख्यमंत्री आवास स्थित देवालय में श्री राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के शुभ अवसर श्री रामचरितमानस की चौपाइयों का पाठ किया। इसके उपरांत उन्होंने आवास परिसर में स्थित गौशाला पहुंचकर गौ माता की सेवा भी की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आदरणीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के कुशल नेतृत्व में श्री राम मंदिर के रुप में सनातन संस्कृति के वैभव की पुनर्स्थापना का साक्षी बनना हम सभी के लिए परम सौभाग्य का क्षण है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 500 वर्षों के लंबे संघर्ष व अनेक रामभक्तों के बलिदानों के बाद इस भव्य व दिव्य महोत्सव का साक्षी बनकर अत्यंत प्रफुल्लित व हर्षित हूँ। राम जन-जन के हैं, राम हर कण में हैं। इस पावन अवसर पर चहुँदिशि आनंद, उत्साह तथा उल्लास है, संपूर्ण जगत में एक अलग ही तरंग और उमंग है।मुख्यमंत्री ने समस्त प्रदेशवासियों से घरों, सामाजिक स्थानों व धार्मिक स्थलों को साफ़ सूथरा रखने तथा इस पावन अवसर को पर्व की भाँति मनाने का आह्वान किया।

उन्होंने सभी से भावी पीढ़ी को इस संघर्ष और प्रभु राम के जीवन से परिचित कराने के लिए उन्हें इसके विषय में अवगत कराने की अपील भी की। इस दिव्य अवसर पर उन्होंने प्रभु राम जी से प्रदेशवासियों के मंगल एवं पूरे विश्व में रह रहे सभी सनातनियों के कल्याण की कामना की।

CM धामी ने टपकेश्वर में किए दर्शन

अयोध्या में प्रभु श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने टपकेश्वर से वर्चुअल दर्शन कर प्रभु श्रीराम से प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की प्रार्थना की। मुख्यमंत्री ने इससे पहले टपकेश्वर मंदिर में सपरिवार पूजा-अर्चना और यज्ञ किया। अयोध्या में प्रभु श्रीराम के बाल रूप विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा के बाद मुख्यमंत्री ने टपकेश्वर में भक्तजनों को प्रसाद वितरण भी किया।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आज हम सब प्रभु श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के साक्षी बने हैं। यह हर्ष- उल्लास और देश को गौरान्वित करने वाला क्षण है। आज का यह दिन प्रभु श्री राम के न्याय और नैतिकता, सत्यनिष्ठा, साहस, शालीनता और करूणा के भाव को अपने जीवन में लाने के लिए संकल्प लेने का दिन है। उन्होंने कहा कि संतो की तपस्या, कार सेवकों के बलिदान, करोड़ों सनातनियों की प्रतीक्षा और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की प्रबल इच्छाशक्ति के परिणामस्वरूप आज अयोध्या में श्री रामलला अपने भव्य एवं दिव्य मंदिर में विराजमान हो गये हैं। आज का यह स्वर्णिम अवसर हम सभी के जीवन में परम सौभाग्य लेकर आया है।

26 जनवरी की परेड में दिखेगी विकसित उत्तराखंड की झलक

  • भारत पर्व पर पहली बार दिखेगी ‘विकसित उत्तराखण्ड’ की झांकी. भारत पर्व के अवसर पर 23 से 31 जनवरी तक दिल्ली के लाल किले में पहली बार उत्तराखण्ड की विकास यात्रा के दर्शन करने को मिलेंगे। इस बार झांकी की थीम ‘विकसित उत्तराखण्ड’ रखी गई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बाबा केदार की धरती से 21वीं सदी के तीसरे दशक को उत्तराखण्ड का बताया था जिसकी दिशा में राज्य सरकार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में लगातार कदम बढ़ा रही है।
  • ‘विकसित उत्तराखण्ड’ झांकी में सूचना विभाग के संयुक्त निदेशक व नोडल अधिकारी के.एस. चौहान ने बताया कि ‘विकसित उत्तराखण्ड’ झांकी के अग्र भाग में कुमाऊंनी महिला को पारम्परिक वेशभूषा में स्वागत करते हुए दिखाया गया है और पारम्परिक व्यंजन मंडूवा, झंगोरा, रामदाना व कौणी की खेती अथवा राज्य पक्षी मोनाल को दर्शाया गया है और झांकी के मध्य भाग में होम स्टे को दिखाया गया है व इस योजना से हजारों ग्रामीणों को रोजगार मिल रहा है।श्री चौहान ने आगे बताया कि वर्ष 2023 में भारत सरकार ने उत्तराखण्ड के पिथौरागढ़ जिले के सरमोली गांव को सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव घोषित किया था।
  • इसके अतिरिक्त लखपति दीदी योजना से राज्य की महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं। स्वयं सहायता समूह में कार्य करते हुए स्थानीय महिलाएं व सुन्दर पहाड़ों में सौर ऊर्जा और मोबाइल टावर को भी उकेरा गया है। ‘विकसित उत्तराखण्ड’ झांकी के अंतिम भाग में ऑल वेदर रोड़, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना, रोपवे और भारत के प्रथम गांव माणा के लिए रोड़ कनेक्टिविटी को दर्शाया गया है। इन योजनाओं से उत्तराखण्ड में यात्रियों के लिए आवागमन की सुविधा में आमूल-चूल परिवर्तन हुआ है।

हरिद्वार-हर की पैड़ी पर दीपोत्सव

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को अयोध्या में श्रीराम लला विग्रह के दिव्य, भव्य, नव्य मन्दिर में प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के पावन एवं गौरवशाली शुभ अवसर पर विशेष रामनाम ध्वजा से सजे हुये हरकी पैड़ी में आयोजित दीपोत्सव व विशेष आरती कार्यक्रम में प्रतिभाग किया।

मुख्यमंत्री ने हर की पैड़ी पहुंचकर बजाओ ढोल स्वागत में मेरे भगवान आये हैं….., मंगल भवन अमंगल हारी, अयोध्या आये मेरे प्यारे राम बोलो जै-जै श्रीराम आदि श्रीराम भजनों के बीच देश तथा प्रदेश की समृद्धि की कामना करते हुये पूजा-अर्चना तथा विशेष आरती की। पुष्कर सिंह धामी ने जैसे ही दीपोत्सव में दीप प्रज्ज्वलित करना प्रारम्भ किया, देखते ही देखते पूरी हरकीपैड़ी हजारों दीपकों की रोशनी से जगमगा उठी तथा सभी दिशायें पटाखों की ध्वनि तथा जय श्रीराम के उद्घोष से गुंजायमान हो गयी। हरकीपैड़ी की दीपोत्सव तथा विशेष आरती की यह छटा देखकर श्रद्धालु तथा उपस्थित जन-समूह अपने आपको इस अप्रतिम क्षण का साक्षी मानकर धन्य तथा सौभाग्यशाली समझ रहे थे।

दीपोत्सव तथा विशेष आरती कार्यक्रम का आयोजन श्रीगंगा सभा द्वारा किया गया। महामंत्री श्रीगंगा सभा श्री तन्मय वशिष्ठ तथा पदाधिकारियों ने हरकीपैड़ी पहुंचने पर मुख्यंत्री का भव्य स्वागत व अभिवादन किया तथा आभार व्यक्त किया।

Priyanka Gandhi आएंगी Haridwar Loksabha से चुनाव लड़ने!

उत्तराखंड में कांग्रेस के भीतर से अब अपने स्थानीय नेताओं को किनारे कर राष्ट्रीय स्तर के नेताओं को चुनाव लड़ने की मांग हुई है। उत्तराखंड में कांग्रेस की लगातार हार के बाद स्थानीय कार्यकर्ताओं में अपने नेताओं के प्रति भरोसा शायद कम हुआ है। उत्तराखंड में हाल ही में जिला अध्यक्षों का एक सम्मेलन हुआ ।

प्रियंका गांधी को उत्तराखंड में सक्रिय करने की मांग

गढ़वाल मंडल के जिला अध्यक्ष इस कार्यक्रम में सम्मिलित हो रहे थे। आगामी लोकसभा चुनाव के मध्य नजर पार्टी को जीत दिलाई जाने की रणनीति पर चर्चा हो रही थी। ऐसे में वह नाम कौन से हो सकता है जो पार्टी को जीत दिला सकते हैं। इस मुद्दे पर जब चर्चा गर्म हुई तो नाम आया प्रियंका गांधी का। प्रियंका गांधी अगर उत्तराखंड के हरिद्वार संसदीय सीट से चुनावी मैदान में उतरे तो उत्तराखंड कांग्रेस में एक नई जान आ सकती है।

हरीश रावत और हरक सिंह के बारे में नहीं सोचा

उत्तराखंड कांग्रेस के इन जिला अध्यक्षों ने एक बार भी यह नहीं सोचा कि हरिद्वार संसदीय सीट पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत अपनी दावेदारी पेश करते आ रहे हैं। इन तमाम लोगों ने यह भी नहीं सोचा कि हरक सिंह रावत भी इसी सीट पर अपनी दावेदारी प्रस्तुत करते रहे हैं। इन्हें मालूम है की इन दोनों नेताओं की झगड़े के कारण पार्टी को नुकसान हो सकता है। पार्टी में कुछ गुंजाइश जीत की बनी हुई है। इसलिए इसे बेकार नहीं जाने दिया जाना चाहिए। राष्ट्रीय स्तर पर अगर प्रियंका गांधी को हरिद्वार संसदीय सीट से चुनाव लड़ने के लिए आमंत्रित किया जाए तो पार्टी उत्तराखंड में जोश से भर जाएगी।

हिमाचल में जीत दिला चुकी हैं प्रियंका

उत्तराखंड कांग्रेस जनों को इस बात का आभास है कि राहुल गांधी तो हरिद्वार सीट पर चुनाव लड़ने के लिए नहीं आएंगे। साथ ही सोनिया गांधी के भी हरिद्वार सीट से चुनाव लड़ने की संभावना है नहीं है। इसलिए प्रियंका गांधी ही वह करिश्माई व्यक्ति हो सकते हैं जो उत्तराखंड जाकर उत्तराखंड में कांग्रेस को एक नई ऊर्जा दे सकते हैं। वैसे खबर यह भी है कि प्रियंका गांधी की मांग हिमाचल प्रदेश में भी बड़ी हुई है। वहां पिछले विधानसभा चुनाव में प्रियंका गांधी ने प्रचार अभियान की कमान संभाली थी और कांग्रेस को जीत हासिल हुई थी।

सोनिया गांधी जा सकती हैं राज्यसभा

खबर यह भी है कि अगले कुछ महीनो में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का राज्यसभा का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। ऐसे में राज्यसभा में भी प्रियंका को हिमाचल प्रदेश से भेजे जाने की चर्चा तेज हो रही है। कांग्रेस के भीतर हालांकि एक वर्ग यह कह रहा है कि सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी में से किसी एक नेता को लोकसभा का चुनाव लड़ाया जाए और दूसरे नेता को राज्यसभा भेजा जाए । सोनिया गांधी उम्र के उसे पड़ाव पर है जहां लोकसभा चुनाव के लिए प्रचार करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। इसीलिए उन्हें राज्यसभा भेजा जा सकता है और प्रियंका को चुनावी मैदान में उतर जा सकता है। उनके लिए सुरक्षित सीट को तलाशने की कवायद भी शुरू हो गई है। उत्तर प्रदेश की परंपरागत रायबरेली और अमेठी संसदीय सीटों का प्रतिनिधित्व करने वाली कांग्रेस उत्तर प्रदेश से धीरे-धीरे किनारे हो रही है। क्योंकि वहां पर उनका जनाधार खिसकने लगा है, और राहुल गांधी की हार के बाद यह स्पष्ट भी हुआ है ।

हरक सिंह गढ़वाल, हरीश रावत नैनीताल?

इसीलिए एक सुरक्षित सीट की तलाश है और वह सीट हरिद्वार की हो सकती है। लेकिन अगर हरिद्वार की सीट पर चुनाव लड़ने के लिए प्रियंका गांधी आएंगे तो फिर हरीश रावत और हरक सिंह रावत चुनाव में किधर जाएंगे। हरक सिंह रावत का गढ़वाल संसदीय सीट में थोड़ा बहुत जनाधार है। गढ़वाल संसदीय सीट की कई विधानसभा सीटों का प्रतिनिधित्व हरक सिंह रावत ने किया है। इसलिए वह वहां पर जोर लगा सकते हैं। अगर हरक सिंह रावत ने गढ़वाल संसदीय सीट पर जोर लगाया तो पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदयाल और पिछले प्रत्याशी मनीष खंडूरी क्या करेंगे? यह एक सवाल पैदा हो जाता है. हरीश रावत नैनीताल उधम सिंह नगर सीट पर फिर से जोर आजमाइश करेंगे जहां पिछली बार भी वह चुनाव हार गए थे। अभी देखना यह बाकी है कि आने वाले समय में कांग्रेस कैसे अपने चुनावी पत्ते खोलती है।