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मुख्यमंत्री ने किया जलभराव वाले क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बृहस्पतिवार को जनपद हरिद्वार की तहसील लक्सर के विभिन्न क्षेत्रों-लक्सर बजार मदारपुर, शाहपुर बस्ती, प्रहलादपुर, हस्तमौली में अतिवृष्टि एवं सोनाली नदी के कारण हुये जल भराव से प्रभावित क्षेत्रों का रेस्क्यू बोट एवं ट्रैक्टर में बैठकर स्थलीय निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने प्रभावितों से बातचीत कर उनका हालचाल जाना तथा राहत एवं बचाव कार्यों के सम्बन्ध में अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिये।

मुख्यमंत्री ने लक्सर क्षेत्र में सोनाली एवं अन्य नदियों से होने वाले जल भराव की स्थिति के प्रभावी रोकथाम के लिये फ्लड मैनेजमेंट प्लान तैयार करने के भी निर्देश दिये।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखने और प्रभावितों को तत्काल राहत पहुंचाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ये सुनिश्चित कर लिया जाय कि प्रभावितों को रहने खाने एवं अन्य आवश्यक सामग्री की पूर्ण उपलब्धता हो। पेयजल के साथ ही बच्चों को दूध की पर्याप्त व्यवस्था रखी जाए। जलभराव वाले क्षेत्रों से पानी की निकासी जल्द की जाए। जल जनित रोगों से बचाव के लिए भी सभी आवश्यक व्यस्थाएं की जाय।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि बारिश से पेयजल, विद्युत, सड़क एवं अन्य व्यवस्थाएं जो प्रभावित हुयी हैं, उन्हें शीघ्र सुचारू किया जाय। प्रभावित क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने के साथ ही उनके लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं।

राष्ट्रीय खेलों की तैयारी शुरू

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में गुरुवार को सचिवालय में अगले वर्ष राज्य में आयोजित होने वाले 38वें राष्ट्रीय खेलों के आयोजन के सम्बन्ध में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित हुई। बैठक में आयोजन तिथियों, आयोजन स्थलों, खेल के आयोजनों के साथ ही राष्ट्रीय खेलों के आयोजन से संबंधित अवस्थापना सुविधाओं एवं व्यवस्थाओं के सम्बन्ध में व्यापक विचार विमर्श हुआ।

बैठक में खेल मंत्री रेखा आर्य, मुख्य सचिव डा. एस. एस. संधु अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, विशेष प्रमुख सचिव अभिनव कुमार, सचिव मुख्यमंत्री विनय शंकर पाण्डेय एस. एन. पाण्डेय सहित खेल विभाग तथा भारतीय एवं उत्तराखण्ड ओलंपिक संघ के पदाधिकारी मौजूद रहे। निदेशक खेल जितेन्द्र कुमार सोनकर ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से आयोजन व्यवस्थाओं की जानकारी दी।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य में अगले वर्ष 2024 में अक्टूबर-नवंबर में 38वें राष्ट्रीय खेलों तथा देहरादून, ऋषिकेश, हरिद्वार हल्द्वानी, नैनीताल रुद्रपुर एवं गूलरभोज में निर्धारित आयोजन स्थलों पर खेलों के आयोजन पर सहमति व्यक्त करते हुए इस आयोजन को भव्यता एवं गरिमा के साथ आयोजित किये जाने के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि इसके लिए उच्चाधिकार समिति(एच.पी.सी.) का भी गठन किया जाए जो आयोजन से सम्बन्धित व्यवस्थाओं एवं जरूरतों का ध्यान में रखते हुए त्वरित निर्णय लेने में सक्षम होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जी-20 के सफल आयोजन की भांति यह आयोजन भी सफलतापूर्वक सम्पन्न हो इसका ध्यान रखा जाए इसमें राज्य की देश में बेहतर पहचान बनेगी तथा राज्य के पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। मुख्यमंत्री ने इस आयोजन में राज्य के परम्परागत खेलों को भी शामिल करने की बात कही। उन्होंने इसके लिए अभी से वातावरण के सृजन पर भी ध्यान देने को कहा। मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि गत वर्ष गुजरात एवं इस वर्ष गोवा में आयोजित हो रहे राष्ट्रीय खेलों के आयोजन व्यवस्थाओं का भी अध्ययन किया जाए ताकि व्यवस्थायें और बेहतर हो सके पर्यटन के साथ राज्य की संस्कृति के प्रचार प्रसार का यह आयोजन माध्यम बने इस पर भी ध्यान दिया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय खेलों में हमारे खिलाड़ी बेहतर प्रदर्शन कर सके इसके लिए राज्य स्तरीय खेलों का भी आयोजन राष्ट्रीय खेलों से पहले किया जाए। राज्य के जो खिलाड़ी दूसरे राज्यों की ओर से खेल रहे है उन्हें भी राज्य की ओर से खेलने के लिए प्रेरित किया जाए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि राज्य में तैयार की गई नई खेल नीति का भी व्यापक प्रचार प्रसार किया जाए। यह नीति राज्य के युवा खिलाड़ियों के व्यापक हित में तैयार की गई है इससे खिलाड़ियों को प्रोत्साहन के साथ हर संभव सुविधा उपलब्ध कराये जाने की व्यवस्था की गई है। उन्होंने खेल नीति से सम्बन्धित सभी सुविधाओं का लाभ खिलाड़ियों को उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए।

G 20 में आए विदेशी मेहमानों ने ऋषिकेश के त्रिवेणी घाट में की गंगा आरती

ऋषिकेश के त्रिवेणी घाट में G_20 के मेहमानों द्वारा गंगा आरती में प्रतिभाग किया गया। इस दौरान प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, अन्य जनप्रतिनिधियों तथा स्थानीय लोगों द्वारा गर्मजोशी से विदेशी मेहमानों का स्वागत किया गया।

गंगा आरती और भजन संगीत से विदेशी मेहमान प्रभावित होकर आध्यात्मिकता में डूबे रहे। कल_कल बहती गंगा की शांत और सुरम्य वादियों को देखकर G_20 के डेलिगेट्स इतने जिज्ञासु, उत्सुक और प्रसन्न दिखे कि गंगा दर्शन के दौरान सेल्फी लेने की होड़ मची रही।

गंगा आरती में विदेशी मेहमानों को भारत की आध्यात्मिकता, योगा, मेडिटेशन, संस्कृति, रीति _नीति और भारत के आतिथ्य सत्कार सबसे एकसाथ साक्षात्कार भी हुआ। गंगा आरती के पश्चात विदेशी मेहमानों ने रात्रिभोज में स्थानीय व्यंजको का लुत्फ उठाया तथा भोज में उनको भारत के मोटे अनाज की और उत्तराखंड की बारहअनाजा संस्कृति का भी परिचय हुआ।

गंगा आरती के दौरान विदेशी मेहमानों को प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के भारत के और उत्तराखंड के परंपरागत प्रयासों का भी परिचय हुआ।

इस दौरान गंगा आरती में उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान लोकसभा सांसद हरिद्वार डॉ. रमेश पोखरियाल ’निशंक’, उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी व प्रेमचंद अग्रवाल, विकासनगर विधायक मुन्ना सिंह चौहान व रायपुर रोड खजान दास, जिला पंचायत अध्यक्ष देहरादून मधु चौहान, महापौर देहरादून सुनील उनियाल व ऋषिकेश अनीता अनीता मंमगाई, पुलिस महानिरीक्षक के. एस. नग्नयाल, आयुक्त गढ़वाल मंडल सुशील कुमार, पुलिस उपमहानिरीक्षक डॉ. योगेंद्र सिंह रावत, सचिव एमडीडीए व महानिदेशक सूचना बशीधर तिवारी, जिलाधिकारी देहरादून श्रीमती सोनिका, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून दिलीप सिंह कुंवर सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, महानुभाव और जनमानस उपस्थित थे।

10 साल में 4 CM नहीं कर पाए लोकायुक्त नियुक्त

नैनीताल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 56 दिन में लोकायुक्त के गठन के निर्देश दिए हैं. मजेदार बात तो यह है कि पिछले 10 साल से चार मुख्य मंत्री लोकायुक्त नहीं बना पाए हैं.उत्तराखंड में मजबूत लोकायुक्त का गठन हो इसको लेकर एक याचिका नैनीताल हाईकोर्ट में हल्द्वानी निवासी रविशंकर जोशी की तरफ से दायर की गई थी.नैनीताल हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को यह निर्देश दिए हैं.

उत्तराखंड में लोकायुक्त को लेकर राजनीतिक माहौल हमेशा से ही गर्म रहा है . राज्य की पहली निर्वाचित सरकार के मुख्यमंत्री एनडी तिवारी ने अपने शासनकाल में राज्य को पहला लोकायुक्त दिया. जस्टिस सैयद रज़ा अब्बास को लोकायुक्त की जिम्मेदारी दी गई. तत्कालीन राज्य सरकार ने लोकायुक्त कार्यालय का पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया. 2009 में जब जस्टिस अब्बास का कार्यकाल समाप्त हुआ तो जस्टिस एमएम घिल्डियाल को लोकायुक्त की जिम्मेदारी तत्कालीन मुख्यमंत्री मेजर जनरल बीसी खंडूरी ने दी.कई मामले लोकायुक्त कार्यालय में राज्य सरकार की शिकायत के संदर्भ में पहुंचे भी.

लोकायुक्त कार्यालय से मिली सूचना के मुताबिक लोकायुक्त कार्यालय को जून 2022 तक भ्रष्टाचार की लगभग साढ़े आठ हजार शिकायतें मिली थी.इनमें से लगभग 7000 शिकायतों का निपटारा भी लोकायुक्त के द्वारा किया जा चुका था. 2013 से जून 2022 के बीच भी लोकायुक्त कार्यालय को लगभग 1000 शिकायतें मिली है. लेकिन इनका समाधान इसलिए नहीं हो पाया क्योंकि इस दौरान राज्य में लोकायुक्त रहा ही नहीं. लोकायुक्त के ना बनाए जाने पर कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही जनता निशाने पर रहे हैं. 2013 से 2017 तक राज्य में कांग्रेस की सरकार थी. इस दौरान कांग्रेस ने लोकायुक्त की नियुक्ति नहीं की. 2012 से 2014 तक राज्य में विजय बहुगुणा मुख्यमंत्री थे. उस समय विजय बहुगुणा कांग्रेस में हुआ करते थे. फरवरी 2014 से लेकर मार्च 2017 तक हरीश रावत राज्य के मुख्यमंत्री रहे . कांग्रेस के इन दोनों मुख्यमंत्रियों ने भी लोकायुक्त को लेकर कोई फैसला नहीं लिया.

2017 के बाद से राज्य में बीजेपी की सरकार है और 6 साल में बीजेपी की सरकार ने भी लोकायुक्त की नियुक्ति नहीं की है. लेकिन 2013 से 2023 तक का सफर राज्य की राजनीति ने तय कर लिया, मगर अभी तक राज्य को लोकायुक्त नहीं मिला. आश्चर्य तो इस बात का है कि बीजेपी ने 2017 के विधानसभा चुनाव में लोकायुक्त के गठन का ऐलान किया था और सरकार बनने के 100 दिन में ही लोकायुक्त देने का वादा किया था. वह वादा भी ठंडे बस्ते में चला गया है . 2017 में मुख्यमंत्री बनने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने लोकायुक्त बिल को विधानसभा में प्रस्तुत किया लेकिन उसे पास नहीं किया गया. सरकार ने लोकायुक्त बिल को विधानसभा की प्रवर समिति को चर्चा के लिए भेज दिया. लेकिन 2017 से 2023 तक विधानसभा की प्रवर समिति अपने सुझाव सहित इस बिल को वापस नहीं कर पाई है .

वास्तव में लोकायुक्त का जो मजबूत कानून 2011-12 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मेजर जनरल बीसी खंडूरी ने तैयार करवाया था, उसमें लोकायुक्त के दायरे में मुख्यमंत्री को भी शामिल कर लिया गया था और यही सबसे बड़ी समस्या है क्योंकि कोई भी मुख्यमंत्री किसी लोकायुक्त के दायरे में नहीं आना चाहता. यही कारण है कि पिछले 10 साल में 4 मुख्यमंत्रियों ने उत्तराखंड में शासन किया और किसी भी मुख्यमंत्री ने लोकायुक्त को नियुक्त करने की जिम्मेदारी नहीं निभाई.आश्चर्य तो इस बात का है कि पिछले 10 साल से जिस कार्यालय में लोकायुक्त है ही नहीं, उस कार्यालय पर राज्य सरकार ने 30 करोड़ रुपए खर्च कर दिए हैं .

नैनीताल हाईकोर्ट ने जब पिछली बार सुनवाई की थी तो राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए उसने एक शपथ पत्र दायर करने के लिए कहा था. नैनीताल हाईकोर्ट ने दिशा निर्देश दिए थे कि सरकार बताए कि लोकायुक्त कार्यालय पर कितना पैसा खर्च हो चुका है, और हर वर्ष कितना पैसा खर्च होता है. वर्षवार दिए गए ब्योरे के मुताबिक लगभग 30 करोड़ रुपए पिछले 10 साल में लोकायुक्त कार्यालय पर खर्च हो गए. कोर्ट ने इस पर हैरानी जताई और इसके बाद हर तरीके के खर्च पर रोक लगा दी है जो लोकायुक्त कार्यालय के संदर्भ में किया जाता है. इसके साथ ही निर्देश दिए हैं कि 56 दिन के भीतर राज्य सरकार लोकायुक्त के गठन का रास्ता साफ करें। अब देखना यह मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी क्या लोकायुक्त की नियुक्ति करते हैं वह भी इसे डालने के लिए अदालत का रुख करते हैं।

विदेशी मेहमानों ने किया योग

नरेंद्र नगर में आयोजित जी_ 20 के इंफ्रास्ट्रक्चर वर्किंग ग्रुप की मीटिंग में सम्मिलित होने आए विदेशी डेलिगेट्स ने बैठक के अंतिम दिन बुधवार को ऋषिकेश स्थित महर्षि महेश योगी साधना केंद्र चौरासी कुटिया में पहुंचकर योगा, मेडिटेशन और आध्यात्मिकता का नैसर्गिक अनुभव लिया गया।

विदेशी मेहमानों द्वारा इस दौरान प्राकृतिक शैली में निर्मित कुटिया, मेडिटेशन केव, फोटो गैलरी, महर्षि योगी से संबंधित पोस्ट ऑफिस, किचन और योगी ध्यान विद्यापीठ आदि का अवलोकन किया गया । इस दौरान विदेशी मेहमानों ने योगा और मैडिटेशन भी किया | जी-20 के डेलिगेट्स महर्षि योगी से जुड़े प्रसंगों तथा स्मृतियों को जानने तथा समझने के लिए अत्यधिक उत्सुक दिखे |

विदेशी मेहमान जिज्ञासावश सेल्फी भी लेते रहे। इस दौरान जी _20 के डेलीगेट्स ने ऋषिकेश के विश्व प्रसिद्ध रॉक बैंड का भी आनंद लिया। विदेशी मेहमान महर्षि महेश योगी के ट्रेसडेंशियल मेडिटेशन ( इस दुनिया से परे दिव्य संसार का अनुभव ) के अनुभव से बहुत आनंदित दिखे। ट्रेसडेंशियल मेडिटेशन का अर्थ है ( इस दुनिया से परे दिव्य संसार का अनुभव ) ध्यान की वह क्रिया जिसमें आंख मूंदकर विश्राम की अवस्था में बैठकर 15 से 20 मिनट तक दो बार ध्यान किया जाता है।

जिलाधिकारी डॉ आशीष चौहान, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्वेता चौबे तथा जिला प्रशासन और उपस्थित लोगों द्वारा विदेशी मेहमानों का भारतीय संस्कृति, परंपरा और रीति-रिवाज के साथ गर्मजोशी से शंख ध्वनि के साथ स्वागत किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में सामान्य जनमानस भी उपस्थित थे ।

मुख्यमंत्री ने दिये निर्माण में तेजी लाए के निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को सर्किट हाउस काठगोदाम में विकास योजनाओं के क्रियान्वयन तथा मानसून सीजन के दृष्टिगत मंडल स्तरीय व जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं में तेजी लाये जाने के साथ योजनाओं के निर्माण में गुणवत्ता तथा समयबद्धता का ध्यान रखने के भी निर्देश दिए।मुख्यमंत्री ने मानसून के दौरान भारी बारिश के दृष्टिगत संभावित आपदा के प्रभावों को भी कम करने के लिये प्रभावी कार्ययोजना बनाकर कार्य करने को कहा। मुख्यमंत्री ने सभी विभागों से इस सम्बन्ध में सतर्कता एवं समन्वय से कार्य करने के भी निर्देश दिये।

मुख्यमंत्री ने मानसून सत्र को देखते हुए सभी जिलाधिकारियों व सरकारी एजेंसियों को बरसात के सीजन में आने वाली आपदा के पुराने अनुभव को देखते हुए इस बार पुख्ता तैयारी करने के निर्देश दिए हैं । मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, आइटीबीपी सहित लोक निर्माण विभाग और समस्त जिला प्रशासन का अलर्ट रहने को कहा गया है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को क्षेत्रों में सजगता व नजर बनाए रखने के निर्देश देते हुए कहा कि किसी भी तरह की आपदा के प्रभाव को कम कर बेहतर तरीके से राहत व बचाव का कार्य किया जाए। इसके लिये सभी निर्माण कार्यदायी संस्थायें अपने क्षेत्रों के बरसाती नालों में साफ-सफाई, झाड़ी-कटान का कार्य समय से पूर्ण करने पर ध्यान दें।

सर्किट हाउस काठगोदाम में अधिकारियों की बैठक लेते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मानसून अवधि व आपदा के दृष्टिगत अधिकारियों को सजग रहने के निर्देश दिए। कहा कि समस्त अधिकारी अपने क्षेत्रों में पल-पल के खबरों की जानकारी लेते हुए नजर बनाए रखें जिससे किसी भी प्रकार की आपदा के घटित होने पर उसके प्रभाव को कम करते हुए ससमय राहत व बचाव का कार्य किया जा सके। सीएम ने कहा कि हम किसी भी आपदा को रोक नहीं सकते किंतु उसके होने वाले प्रभावों को कम कर सकते है, इसके लिए हम सभी को सजग रहते हुए कार्य करना है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बरसात के सीजन में आने वाली आपदा के पुराने अनुभव को देखते हुए अधिकारियों को इस बार पुख्ता तैयारी करने के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने कहा कि समस्त निर्माण दाई संस्था अपने क्षेत्रों में नालों की साफ-सफाई, झाड़ी-कटान के साथ ही सड़को पर पड़े हुए मलबे को साफ करना सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश में मानसून पहुंच चुका है लिहाजा एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, आइटीबीपी सहित लोक निर्माण विभाग और समस्त जिला प्रशासन एलर्ट मोड़ पर रहते हुए कार्य करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड पर्यटन प्रदेश होने के नाते हमारा दायित्व बनता है कि हम पर्यटकों को बेहतर सुविधा मुहैया करायें जिससे हमारा पर्यटन आधारित प्रदेश समृद्ध हो सके व पर्यटक प्रदेश की बेहतर छवि लेकर जाए। मुख्यमंत्री ने ट्रैफिक प्लान, पेयजल के साथ ही विकास कार्यों की भी अधिकारियों से जानकारी प्राप्त की। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने अवैध अतिक्रमण को हटाने के संबंध में कहा कि अब तक 2700 हेक्टेयर भूमि पर अतिक्रमण चिन्हित हुआ है और धीरे-धीरे वन भूमि और सरकारी भूमि में हुए अतिक्रमण को हटाया जा रहा है और सरकार द्वारा लोगों से भी अपील की गई है जो स्वयं अतिक्रमण भूमि में बैठे हैं वह अपना अतिक्रमण स्वतः खाली कर

CS संधू ने ली बैठक

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने मंगलवार को सचिवालय में प्रदेश के सभी जनपदों के जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से 30 बिंदुओं के क्रियान्वयन के सम्बन्ध में बैठक ली। मुख्य सचिव द्वारा पूर्व में सभी जिलाधिकारियों को 30 बिन्दुओं पर प्राथमिकता के आधार पर कार्य करने हेतु सूची भेजी गयी थी, जिनको प्राथमिकता पर कार्य करने हेतु सुझाव अथवा आने वाली समस्याओं और उनके निराकरण पर सुझाव मांगे थे। उन्होंने कहा कि शीघ्र ही इन पर कार्य शुरू किया जाएगा।

मुख्य सचिव ने कहा कि इन 30 बिन्दुओं की मॉनिटरिंग पोर्टल आधारित होगी। अच्छा प्रदर्शन करने वाले जनपदों को पुरस्कृत भी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विभिन्न कार्यों के सरलीकरण पर ध्यान देने की आवश्यकता है। मुख्य सचिव ने कहा कि यह 30 बिन्दु राज्य की प्राथमिकता हैं। इनके लिए अगले एक सप्ताह में पोर्टल तैयार कर लिया जाएगा। इन कार्यों का पोर्टल आधारित अनुश्रवण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जनपदों को ही अपने लिए लक्ष्य निर्धारित करने होंगे। जनपद अपने लक्ष्य अपनी आवश्यकता के अनुसार निर्धारित करेंगे। इन कार्यों को पूर्ण करने हेतु कैलेण्डर भी तैयार किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि जिलाधिकारियों द्वारा अपने अन्य प्राथमिकता पर आधारित कार्यों को भी इसमें जोड़ा जा सकता है। मुख्य सचिव ने कहा कि बहुत से कार्य पूर्व से चल रहे हैं, कुछ शीघ्र ही शुरू होने हैं। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक तरीके से घरों से कचरा प्रबंधन एवं निस्तारण, सरकारी सम्पत्तियों का डिजिटल रिकॉर्ड, जंगलों को आग से बचाने एवं स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए पिरूल का निस्तारण एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने जिलाधिकारी हरिद्वार को जनपद में सफाई के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार किए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सबसे अधिक संख्या में पर्यटक और श्रद्धालु हरिद्वार में ही आते हैं। वहां सफाई की उचित व्यवस्था हो इसके लिए नगर निगम और हरिद्वार रूड़की विकास प्राधिकरण को मिलकर एक सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की विशेष कार्य योजना तैयार किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इसके लिए बजट का प्राविधान किया जाएगा।

कांवड़ यात्रा को लेकर निर्देश जारी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में सोमवार को मेला नियंत्रण भवन (सी0सी0आर0) हरिद्वार में कांवड़ यात्रा-2023 की तैयारियों के सम्बन्ध में जन-प्रतिनिधियों, शासन के उच्चाधिकारियों एवं जिला स्तर के अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय गहन समीक्षा बैठक आयोजित हुई।

समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को कावड़ मेला आरंभ होने से पूर्व सभी आवश्यक व्यवस्थायें समयबद्धता के साथ सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। उन्होंने निर्देश दिये कि कावड़ यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा जाए। श्रद्धालु अपने मन-मस्तिष्क में देवभूमि का अच्छा सा संदेश लेकर अपने गन्तव्य को जाए। उन्होंने निर्देश दिये कि साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाये तथा साफ-सफाई की ऐसी व्यवस्था बनाई जाये कि हर दो-दो घण्टे में शौचालयों आदि की सफाई की जाये, जिसके लिये सम्बन्धित की जिम्मेदारी निर्धारित की जाये।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पार्किंग स्थलो पर जहां आवश्यकता हो इण्टरलांकिंग टाइल्स लगाई जायें ताकि पार्किंग में कीचड़ न हो तथा गाड़ियों के फंसने की समस्या पैदा न हो। उन्होंने ये भी निर्देश दिये कि जो भी सीसीटीवी लगाये जा रहे हैं, उनकी नियमित मॉनिटरिंग हो ताकि जहां पर भी ऐसी कोई घटना सामने आती है, जिस पर सुरक्षा आदि की दृष्टि से तुरन्त निर्णय लेना है, उस पर दु्रत गति से निर्णय लिया जाये तथा वहां पर बिल्कुल भी ढिलाई न बरती जाये।मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि कावड़ यात्रा सकुशल सम्पन्न कराना अधिकारियों की जिम्मेदारी है। सभी सम्बन्धित अधिकारी अपनी इस जिम्मेदारी का निर्वहन कर्तव्यनिष्ठा एवं सजगता से करे।

कावड़ यात्रा मार्ग पर तथा पार्किग स्थलों पर साइनेज प्रकाश एवं स्वच्छता आदि को भी कारगर व्यवस्था बनाये जाने के निर्देश मुख्यमंत्री ने दिये।मुख्यमंत्री ने कहा कि कांवड़ यात्रा के लिए श्रद्धालुओं की सुविधा के दृष्टिगत जो एडवाइजरी बनाई गई है, उसका व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार किया जाए। कांवड़ यात्रा सुव्यवस्थित हो इसके लिए एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया जाए, जिसमें शासन के वरिष्ठ अधिकारी, पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी एवं कांवड़ मेले से संबंधित जिलों के अधिकारी शामिल किये जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांवड़ मेला अवधि में हरिद्वार में कांवड़ मेले से संबंधित सभी व्यवस्थाओं का पर्यवेक्षण प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु करेंगे।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि पार्किंग स्थलों में पेयजल की पूर्ण व्यवस्था रखी जाए। स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि कांवड़ यात्रा मार्गों पर साइनेज की पूर्ण व्यवस्था हो। कांवड़ पटरी पर विद्युत की पर्याप्त व्यवस्था हो। वन क्षेत्र में जंगली जानवरों से सुरक्षा हेतु चेतावनी बोर्ड लगाये जाएं। कांवड़ मेला के दौरान यात्रा रूटों का पूरा चार्ट दिया जाए। भण्डारे एवं लंगर के लिए हाइवे से दूरी पर स्थान चिन्हित किये जाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह भी सुनिश्चित किया जाए कि कांवड़ मेले के दौरान पर्वतीय जनपदों में आवश्यक सेवाओं एवं सामग्रियों को भेजने के लिए कोई परेशानी न हो। होटलों एवं दुकानों में रेट लिस्ट चस्पा की जाए। स्थानीय स्तर पर लोगों को आवागमन में अधिक परेशानी का सामना न करने पड़े।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बैठक में अधिकारियों से नीलकण्ठ महादेव की व्यवस्थाओं के बारे में विस्तार से जानकारी ली तथा व्यवस्थाओं को चाक-चौबन्द रखने के निर्देश दिये। बैठक में हिलबाई पास रोड को खोले जाने का प्रकरण भी सामने आया। इस पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि आज ही हिलबाईपास को खोले जाने के सम्बन्ध में एनओसी जारी की जाये ताकि हिलबाई पास की मरम्मत आदि का कार्य यथासमय पूरा कर लिया जाये।

बैठक में जिलाधिकारी धीराज सिंह गर्ब्याल एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से कांवड़ यात्रा की समयावधि, विभिन्न राज्यों से आने वाले कांवड़ियों का क्या अनुपात है, कावंड़ यात्रा के क्या-क्या नियम रहेंगे, कांवड़ मार्गों का विवरण, वैकल्पिक मार्गों का विवरण, कांवड़ यात्रा की क्या-क्या चुनौतियां हैं, रोड़ीबेलवाला, बैरागी कैम्प सहित पार्कों में की गयी व्यवस्था, कावंड़ यात्रा के सफल संचालन के लिये नोडल अधिकारियों की नियुक्ति, सरकारी तथा गैर सरकारी प्रमुख स्टेक होल्डर, कांवड़ यात्रियों की सुविधा हेतु क्या-क्या व्यवस्थायें की जा रही है, कांवड़ मेले की दृष्टि से स्वास्थ्य, नगर निगम, विद्युत, सिंचाई, लोक निर्माण आदि विभागों द्वारा की जा रही तैयारियों आदि के सम्बन्ध में विस्तृत जानकारी दी।

जिलाधिकारी हरिद्वार श्री धीराज सिंह गर्ब्याल ने बताया कि कांवड़ मेले के लिए 60 हजार वाहनों की क्षमता के लिए 13 पार्किंग स्थल बनाये गये हैं। इसके अलावा विशेष परिस्थितियों के लिए 03 अतिरिक्त पार्किंग स्थल आरक्षित हैं। उन्होंने कांवड़ यात्रा की तैयारियों के सम्बन्ध में आगे बताया कि कावंड़ मेले के लिये 2720 से अधिक शौचालय, 640 से अधिक यूरेनल तथा मोबाइल शौचालयों की व्यवस्था की जा रही है, जिसके लिये 1200 से अधिक सफाई कार्मिक तैनात किये जा रहे हैं तथा आवश्यकता पड़़ने पर यह संख्या और बढ़ाई जायेगी। उन्होंने बैठक में स्वास्थ्य सम्बन्धी तैयारियों की जानकारी देते हुये बताया कि पूरे मेला क्षेत्र में 21 स्वास्थ्य कैम्प लगाये जा रहे हैं।

इसके अतिरिक्त सभी अस्पतालों में हर तरह के इलाज की व्यवस्था की जा रही है।जिलाधिकारी ने कांवड़ मेले की एसओपी का उल्लेख करते हुये बताया कि कोई भी कांवड़ 12 फीट से ऊंची नहीं होगी, कांवड़िये कोई भी ऐसी सामग्री अपने साथ लेकर नहीं चलेंगे, जिससे नुकसान पहुंचने की संभावना हो तथा व्यापारी बन्धु भी इस तरह की कोई भी सामग्री की बिक्री नहीं करेंगे तथा कांवड़ियों को निर्धारित ध्वनि प्रदूषण के नियमों का पालन करना होगा। इस पर मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि कानून एवं व्यवस्था के प्रश्न पर कहीं पर भी कोई समझौता नहीं किया जायेगा।

बैठक में जिलाधिकारी ने बताया कि कांवड़ मेले से सम्बन्धित सारी व्यवस्थायें 30 जून तक पूरी कर ली जायेंगी। बैठक में अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को कांवड़ मेले के संचालन के लिये बनाई गयी व्यवस्था के सम्बन्ध में बताया कि कांवड़ मेले को 12 सुपर जोन, 32 जोन तथा 134 सेक्टरों में बांटा गया है, जिसके पूरे संचालन के लिये पांच नोडल अधिकारी नामित किये गये हैं।बैठक में प्रकाश व्यवस्था, सुरक्षा व्यवस्था, पेट्रोल, डीजल, गैस, खाद्य सामग्री आदि का कांवड़ मेले की दृष्टि से रिजर्व स्टॉक रखना, वन विभाग के क्षेत्र में जंगली जानवरों से रक्षा के लिये टीम गठित करना, आपदा प्रबन्धन द्वारा की जाने वाली व्यवस्थायें, एनएसएस, स्वयंसेवी संस्थाओं आदि की सहायता लेना, रेलवे तथा रोडवेज की व्यवस्थायें, विभिन्न स्थानों में कावंड़ियों को राहत देने के लिये स्पेंक्लर स्थापित करना आदि की जानकारी देते हुये उस पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ।

अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ निषेध दिवस पर प्रदेश के सभी चिकित्साधिकारी व कर्मचारियों ने ली शपथ

समाज को नशा मुक्त करने के लिए एकजुट होकर प्रयास करें यह बात स्वास्थ्य सचिव एवं उत्तराखंड राज्य एड्स नियंत्रण समिति परियोजना निदेशक डॉ आर राजेश कुमार द्वारा अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ निषेध दिवस पर स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय में प्रदेश भर से भौतिक व वर्चुअल माध्यम से जुड़े अधिकारियों व कर्मचारियों को नशा मुक्ति पर शपथ के दौरान कही।

इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ निषेध दिवस की थीम पीपल फर्स्ट: स्टॉप स्टीकमा एंड डिस्क्रिमिनेशन, स्ट्रेंथन प्रिवेंशन है।स्वास्थ्य सचिव ने नशे से होने वाले नुकसान के बारे में तथा इसे समाज से दूर करने के बारे में जानकारी दी व सभी मौजूद अतिथि गणों को नशे के विरुद्ध शपथ दिलाई गयी। स्वास्थ्य सचिव ने अपील की है कि वे नशे से दूर रहें। नशा एक धीमा जहर है जिससे खुद भी बचें तथा अपने बच्चों को भी सुरक्षित रखें। किसी भी प्रकार के लालच में आकर नशा तस्करी न करें।

कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य सचिव ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ निषेध दिवस का उद्देश्य नशे से विशेषकर युवावर्ग का जीवन बचाने और ड्रग्स के प्रति लोगो को जागरूक किया जाना है। उन्होंने कहा नशे के सबसे अधिक शिकार युवा हैं और नशे की लत से व अपने भविष्य को दिशाहीन बना देते हैं। बहुत से युवाओं में सुई से नशा करने का प्रचलन बढ़ा है जिस कारण समाज में एच.आई.वी. संक्रमण लगातार बढ़ रहा है। इसलिए उनको जागरुक होना बहुत आवश्यक है तभी वे इस बुरी आदत से स्वयं को सुरक्षित रख पाएंगे।स्वास्थ्य सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने बताया कि केंद्रीय सरकार ने मादक और नशीले पदार्थ अधिनियम के अंतर्गत नशीली दवाओं का प्रयोग करने वाले लोगों की पहचान, उपचार और उनके पुर्नवास का प्रबंध किया है।

ओपियाइड सब्सटिट्यूशन थैरेपी (ओ.एस.टी.) निर्धारित उपचार है जिसका उपयोग मादक पदार्थ पर निर्भरता को कम करने के लिए होता है। यह इलाज एच.आई.वी. संक्रमण होने एवं इसके फैलने के खतरे को कम करता है। यह सुई से नशा करने के जोखिमपूर्ण उपयोग से शरीर को होने वाले नुकसानों को कम करता है एवं नशीली दवाओं के प्रति तीव्र इच्छा को कम करने में मदद करता है।कार्यक्रम में स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ विनीता शाह, निदेशक डॉ सरोज नैथानी, अपर परियोजना निदेशक डॉ अजय कुमार नगरकर, डॉ अमित शुक्ला, डॉ मंयक बडोला, डॉ पकंज कुमार सहित अधिकारी कर्मचारी मौजूद थे।

मुख्यमंत्री धामी ने देहरादून सचिवालय स्थित आपदा कन्ट्रोल रूम का औचक निरीक्षण

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को सचिवालय स्थित राज्य आपदा प्रबंधन कन्ट्रोल रूम का औचक निरीक्षण कर प्रदेश भर में जारी भारी बारिश की स्थिति के संबंध में जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आपदा कंट्रोल रूम से प्रदेश में मौसम की वर्तमान स्थिति, बारिश की स्थिति, बारिश से हुए जलभराव एवं नुकसान के बारे में जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि राज्य के अंतर्गत जिन जिलों में अत्यधिक बारिश जारी है एवं आगे भी भारी वर्षा की संभावना है।

उन सभी जिलों के साथ परस्पर संवाद एवं समन्वय बनाकर रखें। ताकि आपातकाल की स्थितियों से समय रहते निपटा जा सके। उन्होंने अधिकारियों को आपदा राहत एवं बचाव कार्यों हेतु हमेशा अलर्ट मोड के रहने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश भर में नदी एवं नालों के इर्द-गिर्द रहने वाले लोगों को सतर्कता बरतने को कहा जाए। लोगों को पुनर्वास करने की स्थिति में प्रत्येक जिले में पर्याप्त मात्रा में रैन बसेरा, राहत सामग्री हो। इसका भी विशेष ध्यान रखा जाए।

उन्होंने कहा जलभराव की स्थिति में पानी निकासी की पर्याप्त व्यवस्था हो। आपदा की दृष्टि से संवेदनशील स्थलों पर एडवांस में जेसीबी मशीन की भी व्यवस्था हो। उन्होंने कहा स्वास्थ्य, पुलिस, एस.डी.आर.एफ कर्मियों की आपदा की दृष्टि से पर्याप्त व्यवस्था की जाए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चारों धामों में यात्रियों की संख्या, भारी बारिश के बीच चार धामों की वर्तमान स्थिति का भी जानकारी प्राप्त की। उन्होंने श्री केदारनाथ धाम का ऑनलाइन माध्यम से लाइव अवलोकन भी किया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जिला अधिकारी हरिद्वार, जिलाधिकारी पिथौरागढ़, जिलाधिकारी चमोली से फोन में वार्ता कर वर्तमान स्थिति के बारे में जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री ने हरिद्वार शहर के विभिन्न इलाकों में हो रहे जलभराव की स्थिति से जल्द निपटने के निर्देश दिए। उन्होंने आपदा की दृष्टि से संवेदनशील सीमांत क्षेत्र चमोली एवं पिथौरागढ़ में भी अधिकारियों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए। इस दौरान सचिव आपदा प्रबंधन डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा, एवं अन्य लोग मौजूद रहे।